MastiYa   MastiYa MastiYa Mastiya on Youtube

Go Back   MastiYa > Mirch Masala > Stories

Reply
 
Thread Tools Search this Thread Display Modes
  #1  
Old 10-14-2009, 10:33 PM
SuYasH's Avatar
SuYasH SuYasH is offline
Founder
 
Join Date: May 2008
Location: Oslo
Age: 33
Posts: 34,507
Rep Power: 1000
SuYasH has disabled reputation
Default बस से होटल के कमरे तक

बस से होटल के कमरे तक

प्रेषक - सन्नी
पिछली कहानी थी "ट्रेन में लंड चूसा" उसके आगे...
दोस्तों सभी ने मेरी एक-एक कहानी पसन्द की और मुझे अपनी गाँड मरवाने की दास्ताँ अन्तर्वासना पर देख गुरुजी के पाँव छूने का दिल करता है। जो मेरी चुदाई की दास्ताँ और मेरी की हुई मेहनत पर पानी नहीं फिरने देते।
ट्रेन में मैंने दो फौजियों के साथ ख़ूब मस्ती की। उन्होंने मुझे अपना नम्बर तक दे डाला लेकिन मैंने उनसे मिलना ज़रूरी नहीं समझा क्योंकि मैं सफर में बने सम्बन्ध को वहीं छोड़ देता हूँ।
दोस्तों एक बार मैं कॉलेज के लिए बस पकड़ने के लिए खड़ा था। इन्तज़ार था किसी खचाखच भरी बस का। तभी एक मिनी बस आई, मैं चढ़ गया और मेरी निगाहें किसी ऐसे मर्द को तलाश कर रहीं थीं जिसे देख मैं समझ लूँ कि कहीं वो मेरी हरक़त पर बवाल तो नहीं मचा देगा।
तभी मैंने एक मूछों वाला कड़क सा मर्द देखा। मुझे लगा कि वो सही रहेगा। ख़ैर मैं उसके आगे खड़ा हो गया। मैंने देखा था उसका वो भाग काफी फूला हुआ था, मैं उसके पास ही आगे खड़ा हो गया। ५ मिनट वैसी ही उधर-उधर का जायज़ा लेकर मैंने धीरे से गाँड को हरक़त में लाने की कोशिश की और पहले धीरे से उसपर दवाब दिया। भीड़ की वज़ह से जब धक्का लगा तो हम झुक गए। फिर मैंने गाँड गोल-गोल तरीके से घुमानी शुरु की, अपना जलवा और तज़ुर्बा शुरु किया। उसको मैंने अहसास दिला दिया कि मैं अपनी मर्ज़ी से अपनी गाँड उसके लंड से घिस रहा हूँ। उसके लंड में भी हरक़त महसूस हुई। साफ़ लगा कि वह खड़ा हो रहा था।
मैंने गाँड को और दबाया। मैंने एक हाथ से ऊपर डंडे को पकड़ रखा था, धीरे से दूसरा हाथ नीचे लेकर गया। भीड़ में किसी का ध्यान वहाँ नहीं था। मैंने हाथ से उसको छू लिया। उसे बहुत अच्छा लगा। मैंने और सहलाया और उसने कान के क़रीब आकर बोला, "कहाँ जाना है?"
मैंने उसे बताया कि कॉलेज।
उसने कहा,"बहुत मज़ा आ रहा है, लेकिन यहाँ ठीक नहीं है। अगले स्टॉप पर उतर जाते हैं।"
मैंने अनजान बनकर पूछा - "लेकिन वहाँ क्या होगा?"
उसने कहा,"यार उतर तो सही, मेरे दोस्त का एक गेस्ट-हाउस है। हमसे कौन सा पैसे लेगा। चले हैं न वहाँ।"
ऐसे ही कान में फुसफुसात हुए, इधर-उधर देख बातें करते हुए उसका लंड मसल दिया।
उसने कहा,"साले गाँडू, यहीं खड़ा करके जुलूस मत निकलवा देना"
दोनों बस से उतर गए, सीधा गेस्ट-हाउस गए। उसका दोस्त वहाँ नहीं था, रूम-सर्विस वाला लड़का था। वह प्यार से उससे मिला, एक कोने में ला जाकर कुछ कहा, उसने एक चाबी उसे दी और हम दोनों दूसरी फ्लोर पर एक ए.सी. कमरे में पहुँच गए।
उसने कहा,"अच्छा कमरा है।" और उसने दरवाज़ा लॉक कर दिया और सीधा मुझे पकड़ लिया और मेरी गाँड मसलने लगा, मेरे मम्मे दबाने लगा।
मैंने अपनी शर्ट उतार दी और फिर देखते ही देखते सिर्फ अण्डरवीयर में रह गया। उसके बाद मैं उठा और उसके भी सारे कपड़े उतार दिए और उसको खड़ा कर ख़ुद घुटनों के बल बैठ कर सीधा ही उसके लंड को मुँह में भर कर चूसने लगा। वो आहें भर-भरकर मुझसे चुसवा रहा था। मैं भी उसके नुकीले लंड को बड़े मज़े से चूस रहा था, क्या लंड मिला था।
मैंने कुछ देर चूसने के बाद उसको कहा कि अब चोद लो और झट से उसके सामने घुटनों के बल झुक कर घोड़ी बन गया।
वो बोला,"ऐसे ही घोड़ी बने-बने कुतिया की तरह चलता हुआ आ और मेरा चूस।"
मैंने कुछ देर चूसने के बाद अपनी गोरी गाँड उसकी ओर कर दी और कॉण्डोम चढ़ा दिया और बोला- चल डाल दे।
उसने भी घुसाना शुरु किया। कामासूत्र के कॉण्डोम में बहुत चिकनाई से जिससे मुझे बहुत आनन्द आ रहा था। हाय राजा... फाड़ डाल मेरी आज... धो डाल मुझे।
ले साले, यह ले - कह जब वो झटके मारता तो जान निकाल देता।
बहुत दम था उसकी जाँघों में। ज़बर्दस्त चोद रहा था। हाय, ऐसा ही मर्द मैं तलाशता हूँ, जो कमीना ऐसे ही घिस-घिस कर ले मेरी।
उसने मुझे पलट कर सीधा कर दिया और बीच में आते हुए लंड गाँड पर रख नीचे घड़ी लगा कर डाल दिया, जिस से गाँड कस सी गई। वो भी मास्टर निकला इन कामों का। बोला "साले अब बोल, रगड़ का मज़ा मिलता है?"
"हाँ मिलता है"
कुछ ही पलों में उसका भी अन्त हो गया। अह...अहहहह.... अहह... आधा घंटा ऐसे ही वो मेरी गाँड मारता रहा और बोला,"झड़ने वाला हूँ। उसने बाहर निकाला और मेरी छाती पर बैठ अपने लंड से कॉण्डोम निकाल, वीर्य मेरे मुँह में डाल दिया और बोला,"थोड़ा चूस दे।"
मैंने मूठ मारते हुए चूसना चालू किया और उसने एकदम अपने हाथ में नियंत्रण लेते हुए तेज़ी से हिला-हिला कर सारा माल मेरे मुँह में डाल दिया। एक-एक क़तरा चाट-चाट कर मैंने साफ़ कर दिया। कुछ देर हम एक-दूसरे से चिपके रहे और मैंने फिर से उसके लंड को थाम कर सहलाना शुरू कर दिया।
वो फिर से हरक़त में आने लगा। देखते-ही-देखते उसका बाम्बो फिर से दहाड़ने लगा और पता नहीं चुदाई का मास्टर था, दूसरी बार दस मिनट चूसता रहा, फिर भी झड़ा नहीं। उसके बाद बोला,"अब तू ख़ुद चुदेगा। तू इसपर बैठ कर उछल।"
मैंने वैसा ही किया। एक घंटा चुदाता रहा। मेरी गाँड लाल हो गई, तब कहीं जाकर वह झड़ने के क़रीब आया। इस बार उसने माल मेरी कमर पर उगल दिया और कुछ गाँड की छेद पर डाल उस पर लंड रगड़ दिया। इससे मुझे बहुत सुख सा मिला। उसका गरम माल लगते ही सारी खुज़ली खतम हो गई।
दोस्तों यह थी सन्नी की एक और चुदाई की दास्ताँ
अगली चुदाई लेकर जल्द हाज़िर होऊँगा, तब तक के लिए लंड एण्ड ओनली लंड
[email protected]

__________________
Thanks
Reply With Quote
Reply

Thread Tools Search this Thread
Search this Thread:

Advanced Search
Display Modes

Posting Rules
You may not post new threads
You may not post replies
You may not post attachments
You may not edit your posts

BB code is On
Smilies are On
[IMG] code is On
HTML code is Off



All times are GMT +5.5. The time now is 05:50 PM.


Powered by vBulletin® Version 3.8.6
Copyright ©2000 - 2014, Jelsoft Enterprises Ltd.
all Rights Reserved @ Mastiya
eXTReMe Tracker