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| माल तैयार है, आ जाओ प्रेषक : अभिषेक चौधरी हाय दोस्तो ! मेरा नाम राहुल है, मेरी उम्र १८ साल है।मैं रामपुर का रहने वाला हूँ। मेरे पिताजी एक अध्यापक हैं जो कि दूसरे शहर में रहते हैं। मेरी माँ का नाम मधु है और उसकी उम्र ३८ साल है परन्तु उसकी जवानी २२ साल की लड़की से कम नहीं है। चूँकि मेरे पिताजी महीने में एक बार आते हैं इसलिए मैं और मेरी माँ ही घर में रहते हैं। एक रात जब मैं खाना खाकर सो रहा था परन्तु मुझे नींद नहीं आ रही थे, मैंने रात के एक बजे दरवाजे में हल्की सी दस्तक सुनी। मैंने माँ के कमरे की ओर देखा तो मेरी माँ चुपके से धीरे-२ दरवाजे पर गई और दरवाजा धीरे से खोला। रात के उन्धेरे में केवल जीरो पॉवर का बल्ब जल रहा था हाल में और गुलाबी रंग की मैक्सी में मधु का आधा शरीर चमक रहा था। दरवाजा खुलते ही नारायण ने अन्दर प्रवेश किया। नारायण की उम्र ३३ साल की होगी और वो हमारे मुहल्ले में बदमाश के नाम से जाना जाता था। मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ लेकिन मैं चुपचाप सब देखता रहा। अंदर आते ही मधु ने दरवाजा बंद कर दिया था और इस बीच नारायण ने मेरे माँ की मस्त गाण्ड पर हाथ फेर दिया। नारायण ने, जो कि नशे में था, अपनी जेब से दारू के एक बोतल निकाली और मेरी माँ ने हाल में ही रखे दो गिलास ले आई। दोनों दारू का रसपान करने लगे। बीच बीच में नारायण मेरी माँ के बड़े बड़े दूधों को दबा देता था और मेरी माँ को किस कर रहा था। नशे में तो वो बड़े प्यासी लग रही थी। मैं चुपचाप सब देख रहा था। पीने के बाद नारायण मेरी माँ को माँ के बेड-रूम में लेकर गया और मेरी माँ को बिस्तर में बैठा दिया और अपना पैंट की चेन खोलने लगा। इतने में नारायण का मोबाइल बजा और वो मेरे कमरे के पास आकर बात करने लगा। मेरी माँ बिस्तर पर नंगी बैठी अपनी बुर को सहला रही थी जैसे उसे लण्ड चाहिए। नारायण फ़ोन पर कह रहा था- माल तैयार है, बस आ जाओ ! मेरी माँ ने नारायण से पूछा- किसका फ़ोन है? उसने कहा- ऐसे ही दोस्त का ! और मेरे माँ के दूधों को दबाने लगा। कुछ देर बाद दरवाजे में फिर दस्तक हुई। इस पर मेरी माँ ने नारायण की तरफ देखा, नारायण ने उससे बोला- मेरा दोस्त है शायद ! और दरवाजे की तरफ लपका। दरवाजा खुलते ही कल्लू भाई अन्दर आ गया, कालू भाई वहाँ का डॉन था, उसकी ऊंचाई ६'४" होगी और उसे अंदर आते हुए देख मेरी माँ ने कपड़े पहनना शुरू कर दिए। नारायण ने मेरी माँ को बोला- ये कालू भाई हैं ! ये सिर्फ़ आज ही के लिए आए हैं, तुम वही सब करो जो मेरे साथ करती हो। मेरे माँ की तो जैसे दिल के मुराद पूरी हो गई हो- दो मर्द मिल गये थे उसे। कालू भाई तो कहाँ रुकने वाले थे, वो झट से मेरे माँ को पकड़ कर उसका दूध दबाने लगा। नारायण भी सब देख रहा था। अब कल्लू भाई ने अपना लण्ड निकाल लिया और मेरी माँ के मुँह में डाल दिया। लण्ड देख कर मेरी माँ मधु मुस्कुरा रही थी। उसका लण्ड ९ इंच का होगा काला और बहुत मोटा। अब वो उसके लण्ड को चूसे जा रही थी और कालू भाई उसकी चूची मसल रहा था। मधु बड़ी प्यासी लग रही थी, मैं चुपचाप सब देख रहा था। पास में ही नारायण सिगरेट पी रहा था, मेरी माँ के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी- हूह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्छ. हाह ! मैं सब देख रह था। अब वो बिलकुल गरम हो गई थी और बोल रही थी- अब बस नारायण इस चूत की आग बुझा दे आज तू ! और नारायण ने इशारा जान कर अपना ८ इंच का लण्ड मेरी माँ की चूत पर रख दिया। वो अपने हाथों से मेरे माँ का दूध दबा रहा था और मेरे माँ को किस कर रहा था। दोनों माहिर खिलाड़ी लग रहे थे। अब नारायण ने अपना लण्ड मेरे माँ की बुर में डाल दिया और वो सित्कारियाँ ले रही थी। अब नारायण ने अपनी स्पीड तेज कर दी और लण्ड को अंदर-बाहर करने लगा। मेरी माँ उसका पूरा साथ दे रही थी। मेरी माँ भी अपना गाण्ड को उछाल रही थे, कुछ देर के बाद नारायण ने अपना पानी मेरे माँ की बुर में छोड़ दिया और उसके ऊपर निढाल होकर गिर गया। वो मेरी माँ के बड़े बड़े दूधों के दबा रहा था उसका पानी मेरे माँ की बुर से टपक रहा था। कुछ देर के बाद नारायण अलग हो गया। मेरी माँ ने कालू का लण्ड मुँह में डाल लिया वो उसे चूसे रही थी। अब कालू भाई का लण्ड खड़ा हो गया था, उसने मेरी माँ को लेटाया और उसकी बुर पे अपना लण्ड रख दिया, मधु के मुँह से आवाज़ आ रही थी- ओह्ह.. कालू चोद दो आज.... ! कालू ने अपना लण्ड पूरा का पूरा उसकी बुर में डाल दिया और धाप मारने लगा। अब नारायण ने भी अपना लण्ड मेरी माँ के मुँह में डाल दिया। अब वो दो दो लण्ड खा रही थी। कुछ देर बाद नारायण का लण्ड फिर से तैयार हो गया। अब नारायण ने मेरी माँ को ऊपर आने को बोला। अब मेरी माँ कालू के ऊपर आ गई। उसने कालू का लण्ड अपनी बुर में रखा और ऊपर हिलने लगी, कालू उसके दूध को दाबने लगा। नारायण अपना लण्ड मेरे माँ की गाण्ड में रगड़ने लगा। मेरी माँ की गाण्ड बड़ी टाईट थी इसलिए नारायण का लण्ड अन्दर नहीं जा रहा था। मेरी माँ ने नारायण को वहीं रखा बोरोप्लस लाने को कहा। नारायण बोरोप्लस मेरे माँ की गाण्ड पर लगाने लगा। वो अपनी मस्त गाण्ड को हिला हिला कर उसका साथ दे रही थी। अब नारायण ने थोड़ा बोरोप्लस अपने लण्ड पर भी लगाया और फिर से डालने की कोशिश की। अब उसका आधा लण्ड मेरी माँ की गाण्ड के अंदर चला गया था। मेरी माँ सिसकियाँ ले लेकर बोल रही थी- ह्म्म्म्म्म्म. हाआह्ह्ह्ह्छ ! अब नारायण अपने लण्ड से उसकी गाण्ड मार रहा था, उसे भी मज़ा आ रहा था, मस्त गाण्ड जो मिली थी उसे ! अब दोनों जवानी का आनन्द ले रहे थे। कुछ देर बाद नारायण का पानी छूटने लगा तो उसने अपना लण्ड निकाल कर मेरी माँ के मुँह में डाल दिया। वो उसके पानी को ऐसे पी रही थी जैसे शरबत। कुछ ही देर में कालू ने अपना लण्ड बाहर निकाला और अपना पानी मेरे माँ के मुँह में डाल दिया। थोड़ी देर के बाद कालू ने फिर अपना कार्यक्रम चालू किया। कालू ने अपना लण्ड मेरे माँ की गाण्ड पर रख दिया और उसकी चिकनी गाण्ड मारने लगा। और वो हांऽऽहंऽऽ की आवाज निकाल रहे थे। अब कालू ने अपना पानी उसकी गाण्ड में छोड़ दिया था। कुछ देर बाद कालू और नारायण ने कल फ़िर आने का वादा करके मेरी माँ की गाण्ड को सहलाया और उनके जाते ही मेरी माँ ने दरवाज़ा बंद करके अपनी बुर सहलाई। वो बड़ी खुश लग रही थी और हो भी क्यों नहीं- उसे दो लण्ड जो मिले थे आज ! abhi7752@gmail.com
__________________ Thanks |
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#2
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Sale, apni maa ke bare main bakwas likhta hai. Muzhe tajjub nahi hoga agar tum apni agli kahani main ye likho ki tumne apni hi maa ko kaise choda. Yaar apni bakwas kahani main apni maa ko to chhod do.
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#3
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saale apni maa ko choodthe dek raha tha .kya bichar hai
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